अन्वयः
सहसा at once, प्रक्षिप्यमाणैः thrown up, अचलैः mountains, उद्दृतम् rose up, जलम् water, आकाशम् sky, समुत्ससर्प touched, ततः then, पुनः again, अवासर्पत् spread
M N Dutt
And on rocks being plunged into the waters, the latter, suddenly swelling up, mounted to the welkin, and again subsided.
Summary
At once the water threw up (by dropping the mountains) rose, touching the sky and spreading.
पदच्छेदः
| प्रक्षिप्यमाणैर् | प्रक्षिप्यमाण (√प्र-क्षिप् + शानच्, ३.३) |
| अचलैः | अचल (३.३) |
| सहसा | सहस् (३.१) |
| जलम् | जल (१.१) |
| उद्धतम् | उद्धत (√उत्-हन् + क्त, १.१) |
| समुत्पतितम् | समुत्पतित (√समुत्-पत् + क्त, १.१) |
| आकाशम् | आकाश (२.१) |
| अपासर्पत् | अपासर्पत् (√अप-सृप् लङ् प्र.पु. एक.) |
| ततस्ततः | ततस् (अव्ययः)–ततस् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | क्षि | प्य | मा | णै | र | च | लैः |
| स | ह | सा | ज | ल | मु | द्ध | तम् |
| स | मु | त्प | ति | त | मा | का | श |
| म | पा | स | र्प | त्त | त | स्त | तः |