जयस्व शत्रून्नरदेव मेदिनीं; ससागरां पालय शाश्वतीः समाः ।
इतीव रामं नरदेवसत्कृतं; शुभैर्वचोभिर्विविधैरपूजयन् ॥
जयस्व शत्रून्नरदेव मेदिनीं; ससागरां पालय शाश्वतीः समाः ।
इतीव रामं नरदेवसत्कृतं; शुभैर्वचोभिर्विविधैरपूजयन् ॥
अन्वयः
नरदेव god of human beings, शत्रून् enemies, जयस्व win, ससागरम् ocean, मेदिनीम् the whole land, शाश्वतीः ever, स्समाः, पालय you rule, इतीव thus, नरदेवसत्कृतम् one who is respected by human as well as gods, रामम् Rama, शुभैः be auspicious, विविधैः several, वचोभिः words, अपूजयन् worshipped.M N Dutt
May you be victorious, O human-divine one! Rule you the Earth eternally! Thus in various auspicious words, did they pay homage to that one honoured by the Brāhmanas, Rāma.Summary
"O Rama the Lord of human beings Let you win over enemies and rule the land for ever." Thus, hailing Rama who is worshipped by humans as well as gods, was worshipped with auspicious words (by the aforesaid gods, siddhas and charanas).॥ इत्यार्षेवाल्मीकीयेश्रीमद्रामायणेआदिकाव्येयुद्धकाण्डेद्वाविंशस्सर्गः ॥This is the end of the twenty second sarga of Yuddha Kanda of the first epic the holy Ramayana composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| जयस्व | जयस्व (√जि लोट् म.पु. ) |
| शत्रून्नरदेव | शत्रु (२.३)–नरदेव (८.१) |
| मेदिनीं | मेदिनी (२.१) |
| ससागरां | स (अव्ययः)–सागर (२.१) |
| पालय | पालय (√पालय् लोट् म.पु. ) |
| शाश्वतीः | शाश्वत (२.३) |
| समाः | समा (२.३) |
| इतीव | इति (अव्ययः)–इव (अव्ययः) |
| रामं | राम (२.१) |
| नरदेवसत्कृतं | नरदेव–सत्कृत (√सत्-कृ + क्त, २.१) |
| शुभैर् | शुभ (३.३) |
| वचोभिर् | वचस् (३.३) |
| विविधैर् | विविध (३.३) |
| अपूजयन् | अपूजयन् (√पूजय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | य | स्व | श | त्रू | न्न | र | दे | व | मे | दि | नीं |
| स | सा | ग | रां | पा | ल | य | शा | श्व | तीः | स | माः |
| इ | ती | व | रा | मं | न | र | दे | व | स | त्कृ | तं |
| शु | भै | र्व | चो | भि | र्वि | वि | धै | र | पू | ज | यन् |
| ज | त | ज | र | ||||||||