तौ ददर्श महातेजाः प्रच्छन्नौ च विभीषणः ।
आचचक्षेऽथ रामाय गृहीत्वा शुकसारणौ ।
लङ्कायाः समनुप्राप्तौ चारौ परपुरंजयौ ॥
तौ ददर्श महातेजाः प्रच्छन्नौ च विभीषणः ।
आचचक्षेऽथ रामाय गृहीत्वा शुकसारणौ ।
लङ्कायाः समनुप्राप्तौ चारौ परपुरंजयौ ॥
अन्वयः
महातेजाः brilliant one, विभीषणः Vibheeshana, प्रतिच्छन्नौ hidden, तौ those two, ददर्श saw, सः that, शुकसारणौ Suka and Saarana, गृहीत्वा took hold of, रामाय Rama's, आचचक्षे brought to the notice.M N Dutt
As they remained thus disguised, they were discovered by Vibhisana. Thereat, taking them captive, he unfolded (the fact) to Rama, saying.Summary
Brilliant Vibheeshana saw both Suka and Saarana hidden in the army. He took hold of them and brought to the notice of Rama.पदच्छेदः
| तौ | तद् (२.२) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महातेजाः | महत्–तेजस् (१.१) |
| प्रच्छन्नौ | प्रच्छन्न (√प्र-छद् + क्त, २.२) |
| च | च (अव्ययः) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
| आचचक्षे | आचचक्षे (√आ-चक्ष् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ऽथ | अथ (अव्ययः) |
| रामाय | राम (४.१) |
| गृहीत्वा | गृहीत्वा (√ग्रह् + क्त्वा) |
| शुकसारणौ | शुक–सारण (२.२) |
| लङ्कायाः | लङ्का (५.१) |
| समनुप्राप्तौ | समनुप्राप्त (√समनुप्र-आप् + क्त, १.२) |
| चारौ | चार (१.२) |
| परपुरंजयौ | परपुरंजय (१.२) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तौ | द | द | र्श | म | हा | ते | जाः | प्र | च्छ | न्नौ | च |
| वि | भी | ष | णः | आ | च | च | क्षे | ऽथ | रा | मा | य |
| गृ | ही | त्वा | शु | क | सा | र | णौ | ल | ङ्का | याः | स |
| म | नु | प्रा | प्तौ | चा | रौ | प | र | पु | रं | ज | यौ |