त्वं तु सौम्य परित्रस्तो हरिभिर्निर्जितो भृशम् ।
प्रतिप्रदानमद्यैव सीतायाः साधु मन्यसे ।
को हि नाम सपत्नो मां समरे जेतुमर्हति ॥
त्वं तु सौम्य परित्रस्तो हरिभिर्निर्जितो भृशम् ।
प्रतिप्रदानमद्यैव सीतायाः साधु मन्यसे ।
को हि नाम सपत्नो मां समरे जेतुमर्हति ॥
अन्वयः
सौम्य: noble, हरिभिः by Vanaras, भृशम् very much, र्निर्जितः vanquished, परित्रस्तः are frightened, त्वंतु: you are, अद्यैव: in this way, सीतायाः Sita, प्रतिप्रदानम् to surrender back, साधु: is good, मन्यसे: thinking.M N Dutt
O amiable one, you, having been hard handled by the monkeys and distressed in consequence, deems it fit that Sītā should be rendered back this very day. What foe of mine is there who is competent to conquer me in battle?Summary
As you are vanquished by the noble Vanaras you are frightened like this and thinking it is good to surrender Sita.पदच्छेदः
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सौम्य | सौम्य (८.१) |
| परित्रस्तो | परित्रस्त (√परि-त्रस् + क्त, १.१) |
| हरिभिर् | हरि (३.३) |
| निर्जितो | निर्जित (√निः-जि + क्त, १.१) |
| भृशम् | भृशम् (अव्ययः) |
| प्रतिप्रदानम् | प्रतिप्रदान (२.१) |
| अद्यैव | अद्य (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| सीतायाः | सीता (६.१) |
| साधु | साधु (२.१) |
| मन्यसे | मन्यसे (√मन् लट् म.पु. ) |
| को | क (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| सपत्नो | सपत्न (१.१) |
| मां | मद् (२.१) |
| समरे | समर (७.१) |
| जेतुम् | जेतुम् (√जि + तुमुन्) |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्वं | तु | सौ | म्य | प | रि | त्र | स्तो | ह | रि | भि | र्नि |
| र्जि | तो | भृ | शम् | प्र | ति | प्र | दा | न | म | द्यै | व |
| सी | ता | याः | सा | धु | म | न्य | से | को | हि | ना | म |
| स | प | त्नो | मां | स | म | रे | जे | तु | म | र्ह | ति |