पदच्छेदः
| भ्रमराचरिता | भ्रमर–आचरित (√आ-चर् + क्त, १.३) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| सर्वकामफलद्रुमाः | सर्व–काम–फल–द्रुम (१.३) |
| यं | यद् (२.१) |
| सूर्यतुल्यवर्णाभम् | सूर्य–तुल्य–वर्ण–आभ (२.१) |
| अनुपर्येति | अनुपर्येति (√अनुपरि-इ लट् प्र.पु. एक.) |
| पर्वतम् | पर्वत (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ्र | म | रा | च | रि | ता | य | त्र |
| स | र्व | का | म | फ | ल | द्रु | माः |
| यं | सू | र्य | तु | ल्य | व | र्णा | भ |
| म | नु | प | र्ये | ति | प | र्व | तम् |