पदच्छेदः
| इक्ष्वाकूणाम् | इक्ष्वाकु (६.३) |
| अतिरथो | अतिरथ (१.१) |
| लोके | लोक (७.१) |
| विख्यातपौरुषः | विख्यात (√वि-ख्या + क्त)–पौरुष (१.१) |
| यस्मिन्न | यद् (७.१)–न (अव्ययः) |
| चलते | चलते (√चल् लट् प्र.पु. एक.) |
| धर्मो | धर्म (१.१) |
| यो | यद् (१.१) |
| धर्मं | धर्म (२.१) |
| नातिवर्तते | न (अव्ययः)–अतिवर्तते (√अति-वृत् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | क्ष्वा | कू | णा | म | ति | र | थो |
| लो | के | वि | ख्या | त | पौ | रु | षः |
| य | स्मि | न्न | च | ल | ते | ध | र्मो |
| यो | ध | र्मं | ना | ति | व | र्त | ते |