पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| धर्मात्मना | धर्म–आत्मन् (३.१) |
| दृष्टा | दृष्ट (√दृश् + क्त, १.१) |
| राक्षसेन्द्रेण | राक्षस–इन्द्र (३.१) |
| राक्षसाः | राक्षस (१.३) |
| विभीषणेन | विभीषण (३.१) |
| तत्रस्था | तत्रस्थ (१.३) |
| निगृहीता | निगृहीत (√नि-ग्रह् + क्त, १.३) |
| यदृच्छया | यदृच्छा (३.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | तु | ध | र्मा | त्म | ना | दृ | ष्टा |
| रा | क्ष | से | न्द्रे | ण | रा | क्ष | साः |
| वि | भी | ष | णे | न | त | त्र | स्था |
| नि | गृ | ही | ता | य | दृ | च्छ | या |