अन्वयः
येन by whom, जनस्थानगता approaching Janasthana, यावन्त all, राक्षसा Rakshasas, हता were killed, रामस्य by Rama, गुणान् virtues, वक्तुम् to speak of, नर human, कश्चित् even, क्षितौ to recount, नशक्त not possible.
M N Dutt
No person can on earth describe the virtues of Rāma; by whom have been slain all those Rākşasas that had gone to Janasthāna.
Summary
"It is not even possible to recount the virtues of Rama who killed all the Rakshasas approaching Janasthana."
पदच्छेदः
| वक्तुं | वक्तुम् (√वच् + तुमुन्) |
| न | न (अव्ययः) |
| शक्तो | शक्त (√शक् + क्त, १.१) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| नरः | नर (१.१) |
| कश्चिद् | कश्चित् (१.१) |
| गुणान् | गुण (२.३) |
| क्षितौ | क्षिति (७.१) |
| जनस्थानगता | जनस्थान–गत (√गम् + क्त, १.३) |
| येन | यद् (३.१) |
| तावन्तो | तावत् (१.३) |
| राक्षसा | राक्षस (१.३) |
| हताः | हत (√हन् + क्त, १.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| व | क्तुं | न | श | क्तो | रा | म | स्य |
| न | रः | क | श्चि | द्गु | णा | न्क्षि | तौ |
| ज | न | स्था | न | ग | ता | ये | न |
| ता | व | न्तो | रा | क्ष | सा | ह | ताः |