पदच्छेदः
| भर्तारम् | भर्तृ (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| ध्यायन्तीम् | ध्यायत् (√ध्या + शतृ, २.१) |
| अशोकवनिकां | अशोक–वनिका (२.१) |
| गताम् | गत (√गम् + क्त, २.१) |
| उपास्यमानां | उपास्यमान (√उप-आस् + शानच्, २.१) |
| घोराभी | घोर (३.३) |
| राक्षसीभिर् | राक्षसी (३.३) |
| अदूरतः | अदूर (५.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | र्ता | र | मे | व | ध्या | य | न्ती |
| म | शो | क | व | नि | कां | ग | ताम् |
| उ | पा | स्य | मा | नां | घो | रा | भी |
| रा | क्ष | सी | भि | र | दू | र | तः |