ततस्तथेति प्रतिगृह्य तद्वचो; बलाधिपास्ते महदात्मनो बलम् ।
समानयंश्चैव समागतं च ते; न्यवेदयन्भर्तरि युद्धकाङ्क्षिणि ॥
ततस्तथेति प्रतिगृह्य तद्वचो; बलाधिपास्ते महदात्मनो बलम् ।
समानयंश्चैव समागतं च ते; न्यवेदयन्भर्तरि युद्धकाङ्क्षिणि ॥
अन्वयः
ततः then, ते those, दूताः attendants, तद्वचः those words, तथाइति so be it, प्रतिगृह्य taking hold, बलाधिपाते the powerful army, महता great, आत्मनो to him, बलंच and the army, समानयान् collected, समागतम् arrived, युद्धकाङ्क्षिणि one who was desirous of war.M N Dutt
Then assenting to his speech with So be it, the envoys immediately summoned that mighty force; and, when in had arrived, they informed their master, eager for conflict, of its arrival.Summary
Then the attendants collected the great powerful army saying, 'so be it', to Ravana who was desirous of war.॥ इत्यार्षेवाल्मीकीयेश्रीमद्रामायणेआदिकाव्येयुद्दकाण्डेद्वात्रिंशस्सर्गः ॥This is the end of the thirty second sarga of Yuddha Kanda of the first epic the holy Ramayana composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| ततस्तथेति | ततस् (अव्ययः)–तथा (अव्ययः)–इति (अव्ययः) |
| प्रतिगृह्य | प्रतिगृह्य (√प्रति-ग्रह् + ल्यप्) |
| तद् | तद् (२.१) |
| वचो | वचस् (२.१) |
| बलाधिपास्ते | बल–अधिप (१.३)–तद् (१.३) |
| महद् | महत् (२.१) |
| आत्मनो | आत्मन् (६.१) |
| बलम् | बल (२.१) |
| समानयंश्चैव | समानयन् (√समा-नी लङ् प्र.पु. बहु.)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| समागतं | समागत (√समा-गम् + क्त, २.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ते | तद् (१.३) |
| न्यवेदयन् | न्यवेदयन् (√नि-वेदय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| भर्तरि | भर्तृ (७.१) |
| युद्धकाङ्क्षिणि | युद्ध–काङ्क्षिन् (७.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त | स्त | थे | ति | प्र | ति | गृ | ह्य | त | द्व | चो |
| ब | ला | धि | पा | स्ते | म | ह | दा | त्म | नो | ब | लम् |
| स | मा | न | यं | श्चै | व | स | मा | ग | तं | च | ते |
| न्य | वे | द | य | न्भ | र्त | रि | यु | द्ध | का | ङ्क्षि | णि |
| ज | त | ज | र | ||||||||