अन्वयः
सीता Sita, पुनः again, प्राप्ताम् returning, वल्गुभाषिणीम् who spoke kindly, सरमाम् Saarana, सुस्निग्धम् very glad, परिष्वज्य embraced, स्वयम् herself, आसनम् seat, ददौ offered.
M N Dutt
And, the fair-spoken Sarama, on getting back (near her), Sītā, embracing her affectionately, herself gave her a seat.
Summary
On seeing the kind Saarana returning, Sita was very glad. She embraced her and offered a seat herself.
पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सीता | सीता (१.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| प्राप्तां | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, २.१) |
| सरमां | सरमा (२.१) |
| वल्गुभाषिणीम् | वल्गु–भाषिन् (२.१) |
| परिष्वज्य | परिष्वज्य (√परि-स्वज् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुस्निग्धं | सु (अव्ययः)–स्निग्ध (२.१) |
| ददौ | ददौ (√दा लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| स्वयम् | स्वयम् (अव्ययः) |
| आसनम् | आसन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तां | तु | सी | ता | पु | नः | प्रा | प्तां |
| स | र | मां | व | ल्गु | भा | षि | णीम् |
| प | रि | ष्व | ज्य | च | सु | स्नि | ग्धं |
| द | दौ | च | स्व | य | मा | स | नम् |