अन्वयः
पुण्येष्वेव at holy places दृढव्रतैः determined firmly, तेषुतेषु those, देशेषु regions चर्यमाणम् performing, तीव्रम् intense, तपः austerities, राक्षसान् Rakshasas, सन्तापयति tormenting.
Summary
"The intense austerities performed by the sages in different regions determined firmly are tormenting the Rakshasas."
पदच्छेदः
| तेषु | तद् (७.३) |
| तेषु | तद् (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| देशेषु | देश (७.३) |
| पुण्येषु | पुण्य (७.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| दृढव्रतैः | दृढ–व्रत (३.३) |
| चर्यमाणं | चर्यमाण (√चर् + शानच्, १.१) |
| तपस्तीव्रं | तपस् (१.१)–तीव्र (१.१) |
| संतापयति | संतापयति (√सम्-तापय् लट् प्र.पु. एक.) |
| राक्षसान् | राक्षस (२.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | षु | ते | षु | च | दे | शे | षु |
| पु | ण्ये | षु | च | दृ | ढ | व्र | तैः |
| च | र्य | मा | णं | त | प | स्ती | व्रं |
| सं | ता | प | य | ति | रा | क्ष | सान् |