अन्वयः
उत्तरस्याम् at the north, पुरद्वारि of the city gate, शुकसारणौ Suka and Sarana, व्यादिश्य posted, स्वयम् himself, चअत्र also there, गमिष्यामि reached, तान् his, मन्त्रिणः ministers, उवाच told.
M N Dutt
He commanded Suka and Sārana to defend the Northern gate. But he said to the counsellors, I will myself go thither.* *i.e. to defend the Northerm gate.
Summary
Ravana posted Suka and Sarana at the north gate of Lanka and himself reached there and told the ministers that he would be there.
पदच्छेदः
| उत्तरस्यां | उत्तर (७.१) |
| पुरद्वारि | पुर–द्वार् (७.१) |
| व्यादिश्य | व्यादिश्य (√व्या-दिश् + ल्यप्) |
| शुकसारणौ | शुक–सारण (२.२) |
| स्वयं | स्वयम् (अव्ययः) |
| चात्र | च (अव्ययः)–अत्र (अव्ययः) |
| भविष्यामि | भविष्यामि (√भू लृट् उ.पु. ) |
| मन्त्रिणस्तान् | मन्त्रिन् (२.३)–तद् (२.३) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| उ | त्त | र | स्यां | पु | र | द्वा | रि |
| व्या | दि | श्य | शु | क | सा | र | णौ |
| स्व | यं | चा | त्र | भ | वि | ष्या | मि |
| म | न्त्रि | ण | स्ता | नु | वा | च | ह |