अन्वयः
पद्महीनाम् without the lotus, श्रियम् इव like Lakshmi, सीताम् Sita, वनात् from forest, आनीय brought her, अहम् I, राघवस्य Rama's, भयात् fear, किमर्थम् for what, प्रतिदास्यामि will not return.
M N Dutt
Why, having brought Sītā like a Sri shorn of her lotus, shall I give her up, from fear of Rāghava?
Summary
"Sita who is like Lakshmi without the lotus has been brought from the forest. Why would I return her for the fear of Rama?"
पदच्छेदः
| आनीय | आनीय (√आ-नी + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| वनात् | वन (५.१) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| पद्महीनाम् | पद्म–हीन (√हा + क्त, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| श्रियम् | श्री (२.१) |
| किमर्थं | किमर्थ (२.१) |
| प्रतिदास्यामि | प्रतिदास्यामि (√प्रति-दा लृट् उ.पु. ) |
| राघवस्य | राघव (६.१) |
| भयाद् | भय (५.१) |
| अहम् | मद् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| आ | नी | य | च | व | ना | त्सी | तां |
| प | द्म | ही | ना | मि | व | श्रि | यम् |
| कि | म | र्थं | प्र | ति | दा | स्या | मि |
| रा | घ | व | स्य | भ | या | द | हम् |