ततः स रामो हरिवाहिनीपति;र्विभीषणेन प्रतिनन्द्य सत्कृतः ।
सलक्ष्मणो यूथपयूथसंवृतः; सुवेल पृष्ठे न्यवसद्यथासुखम् ॥
ततः स रामो हरिवाहिनीपति;र्विभीषणेन प्रतिनन्द्य सत्कृतः ।
सलक्ष्मणो यूथपयूथसंवृतः; सुवेल पृष्ठे न्यवसद्यथासुखम् ॥
अन्वयः
ततः then, सलक्ष्मणः Lakshmana, सः he, रामः Rama, यूथपयूथसम्वृतः surrounded by Vanara heroes, हरिवाहिनीपतिः leader of ocean of monkey troops, विभीषणेन to Vibheeshana, प्रतिनन्द्य offered prayers, सत्कृतः having, सुवेलपृष्ठे Suvela peak, यथासुखम् happily, न्यवसत् rested.M N Dutt
Then the master of the monkey-army, Rāma, saluted and honoured by Vibhisana, accompanied by Lakşmaņa as well as the leaders of the monkeys, sojourned happily on the beast of Suvela.Summary
Thereafter, Rama, the leader of Vanara troops happily rested on Suvela peak after Vibheeshana and Lakshmana duly offered their prayers.॥ इत्यार्षेवाल्मीकीयेश्रीमद्रामायणेआदिकाव्येयुद्धकाण्डेअष्टात्रिंशस्सर्गः ॥This is the end of the thirty eighth sarga of Yuddha Kanda of the first epic the holy Ramayana composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| रामो | राम (१.१) |
| हरिवाहिनीपतिर् | हरि–वाहिनी–पति (१.१) |
| विभीषणेन | विभीषण (३.१) |
| प्रतिनन्द्य | प्रतिनन्द्य (√प्रति-नन्द् + ल्यप्) |
| सत्कृतः | सत्कृत (√सत्-कृ + क्त, १.१) |
| सलक्ष्मणो | स (अव्ययः)–लक्ष्मण (१.१) |
| यूथपयूथसंवृतः | यूथप–यूथ–संवृत (√सम्-वृ + क्त, १.१) |
| सुवेलपृष्ठे | सुवेल–पृष्ठ (७.१) |
| न्यवसद् | न्यवसत् (√नि-वस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| यथासुखम् | यथासुखम् (अव्ययः) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | स | रा | मो | ह | रि | वा | हि | नी | प | ति |
| र्वि | भी | ष | णे | न | प्र | ति | न | न्द्य | स | त्कृ | तः |
| स | ल | क्ष्म | णो | यू | थ | प | यू | थ | सं | वृ | तः |
| सु | वे | ल | पृ | ष्ठे | न्य | व | स | द्य | था | सु | खम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||