धर्मात्मा रक्षसां श्रेष्ठः संप्राप्तोऽयं विभीषणः ।
लङ्कैश्वर्यं ध्रुवं श्रीमानयं प्राप्नोत्यकण्टकम् ॥
धर्मात्मा रक्षसां श्रेष्ठः संप्राप्तोऽयं विभीषणः ।
लङ्कैश्वर्यं ध्रुवं श्रीमानयं प्राप्नोत्यकण्टकम् ॥
अन्वयः
धर्मात्मा righteous, राक्षसश्रेष्ठः best of Rakshasas, अयंविभीषणः this Vibhishana, सम्प्राप्तः having got, श्रीमान् fortunate, अकण्डकम् glorious, धृवम् undoubtedly, लङ्कैश्वर्यम् kingdom of Lanka, प्राप्नोति will get.M N Dutt
And, for certain, that foremost of Rākşasas, the righteous and graceful Vibhīşaņa, who has joined us, shall obtain, without having a thorn in his side, all this wealth of Lankā.Summary
"This Vibheeshana, the best of Rakshasas will be glorious and fortunate undoubtedly having got the kingdom of Lanka."पदच्छेदः
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| रक्षसां | रक्षस् (६.३) |
| श्रेष्ठः | श्रेष्ठ (१.१) |
| सम्प्राप्तो | सम्प्राप्त (√सम्प्र-आप् + क्त, १.१) |
| ऽयं | इदम् (१.१) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
| लङ्कैश्वर्यं | लङ्का–ऐश्वर्य (२.१) |
| ध्रुवं | ध्रुवम् (अव्ययः) |
| श्रीमान् | श्रीमत् (१.१) |
| अयं | इदम् (१.१) |
| प्राप्नोत्यकण्टकम् | प्राप्नोति (√प्र-आप् लट् प्र.पु. एक.)–अकण्टक (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध | र्मा | त्मा | र | क्ष | सां | श्रे | ष्ठः |
| सं | प्रा | प्तो | ऽयं | वि | भी | ष | णः |
| ल | ङ्कै | श्व | र्यं | ध्रु | वं | श्री | मा |
| न | यं | प्रा | प्नो | त्य | क | ण्ट | कम् |