पदच्छेदः
| भिन्नगात्रः | भिन्न (√भिद् + क्त)–गात्र (१.१) |
| शरैस्तीक्ष्णैः | शर (३.३)–तीक्ष्ण (३.३) |
| क्षिप्रहस्तेन | क्षिप्र–हस्त (३.१) |
| रक्षसा | रक्षस् (३.१) |
| प्रजघानाद्रिशृङ्गेण | प्रजघान (√प्र-हन् लिट् प्र.पु. एक.)–अद्रि–शृङ्ग (३.१) |
| तपनं | तपन (२.१) |
| मुष्टिना | मुष्टि (३.१) |
| गजः | गज (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भि | न्न | गा | त्रः | श | रै | स्ती | क्ष्णैः |
| क्षि | प्र | ह | स्ते | न | र | क्ष | सा |
| प्र | ज | घा | ना | द्रि | शृ | ङ्गे | ण |
| त | प | नं | मु | ष्टि | ना | ग | जः |