अन्वयः
देवासुररणोपमे like the war between Devatas and demons, तस्मिन् their, तुमुले confused, विमर्दे rubbing together, वानररक्षसाम् Vanaras and Rakshasas, कबन्धानि trunks of body, दिक्षु directions, समुत्पेतुः scattered.
Summary
It was like the war between Devatas and demons, with the trunks of the bodies of Vanaras and Rakshasas rubbing together lying scattered in all directions.
पदच्छेदः
| कबन्धानि | कबन्ध (१.३) |
| समुत्पेतुर् | समुत्पेतुः (√समुत्-पत् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| दिक्षु | दिश् (७.३) |
| वानररक्षसाम् | वानर–रक्षस् (६.३) |
| विमर्दे | विमर्द (७.१) |
| तुमुले | तुमुल (७.१) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| देवासुररणोपमे | देव–असुर–रण–उपम (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क | ब | न्धा | नि | स | मु | त्पे | तु |
| र्दि | क्षु | वा | न | र | र | क्ष | साम् |
| वि | म | र्दे | तु | मु | ले | त | स्मि |
| न्दे | वा | सु | र | र | णो | प | मे |