अन्वयः
सःरावणिः that Indrajith, तान् his, सर्वान् all, राक्षसान् Rakshasas, एवम् in that way, उक्त्वा having spoken, परिपार्श्वतः those looking at him, सर्वान् all, यूथपानपि army generals, ताडयामास began to strike.
Summary
Indrajith, having spoken in that way to all Rakshasas, began to strike all the Vanara leaders looking at him.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तान् | तद् (२.३) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| राक्षसान् | राक्षस (२.३) |
| परिपार्श्वगान् | परिपार्श्व–ग (२.३) |
| यूथपान् | यूथप (२.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| तान् | तद् (२.३) |
| सर्वांस्ताडयामास | सर्व (२.३)–ताडयामास (√ताडय् प्र.पु. एक.) |
| रावणिः | रावणि (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त्वा | तु | ता | न्स | र्वा |
| न्रा | क्ष | सा | न्प | रि | पा | र्श्व | गान् |
| यू | थ | पा | न | पि | ता | न्स | र्वां |
| स्ता | ड | या | मा | स | रा | व | णिः |