अन्वयः
राक्षसेन्द्रः king of Rakshasas, विभीषणः Vibheeshana, सुग्रीवम् to Sugriva, समाश्वास्य assured, विद्रुतम् knowing, तत् वानरानीकम् that Vanara army, पुनः again, समाश्वासयत् reassured.
M N Dutt
Thus comforting Sugriva, Vibhisana-lord of Rākṣasas-again instilled spirits into the flying forces of monkeys.
Summary
The king of Rakshasas, Vibheeshana having assured Sugriva, knowing the Vanara army he reassured them.
पदच्छेदः
| समाश्वास्य | समाश्वास्य (√समा-श्वासय् + ल्यप्) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सुग्रीवं | सुग्रीव (२.१) |
| राक्षसेन्द्रो | राक्षस–इन्द्र (१.१) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
| विद्रुतं | विद्रुत (√वि-द्रु + क्त, २.१) |
| वानरानीकं | वानर–अनीक (२.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| समाश्वासयत् | समाश्वासयत् (√समा-श्वासय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | मा | श्वा | स्य | तु | सु | ग्री | वं |
| रा | क्ष | से | न्द्रो | वि | भी | ष | णः |
| वि | द्रु | तं | वा | न | रा | नी | कं |
| त | त्स | मा | श्वा | स | य | त्पु | नः |