अन्वयः
रक्षसाम् Rakshasas, मध्ये midst, रावणः Ravana, शत्रू enemy, निपातितौ killed, श्रुत्वा hearing, ततः then, हृष्टः rejoiced, उत्पपात got up, पुत्रम् son, पर्षिस्वजेच embraced
M N Dutt
And hearing that his foe had fallen, Rāvana springing up in the midst of the Rākşasas, With great joy embraced his son.
Summary
In the midst of Rakshasas, Ravana hearing the news of his enemies being killed, rejoiced, and got up from his couch and embraced his son.
पदच्छेदः
| उत्पपात | उत्पपात (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| हृष्टः | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.१) |
| पुत्रं | पुत्र (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| परिषस्वजे | परिषस्वजे (√परि-स्वज् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रावणो | रावण (१.१) |
| रक्षसां | रक्षस् (६.३) |
| मध्ये | मध्य (७.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| शत्रू | शत्रु (२.२) |
| निपातितौ | निपातित (√नि-पातय् + क्त, २.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| उ | त्प | पा | त | त | तो | हृ | ष्टः |
| पु | त्रं | च | प | रि | ष | स्व | जे |
| रा | व | णो | र | क्ष | सां | म | ध्ये |
| श्रु | त्वा | श | त्रू | नि | पा | ति | तौ |