अन्वयः
विभीषणः Vibheeshana, माययैव occult, वीक्षमाणः started looking, मायाप्रतिच्छन्नम् searched with occult powers, अथ and then, अवस्थितम् stood, तम् his, भ्रातुःपुत्रम् brother's son, ददर्श saw.
Summary
Vibheeshana started looking with occult powers for his brother's son endowed with occult power following occult means and found Indrajith.
पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| मायाप्रतिच्छन्नं | माया–प्रतिच्छन्न (√प्रति-छद् + क्त, २.१) |
| माययैव | माया (३.१)–एव (अव्ययः) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
| वीक्षमाणो | वीक्षमाण (√वि-ईक्ष् + शानच्, १.१) |
| ददर्शाथ | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.)–अथ (अव्ययः) |
| भ्रातुः | भ्रातृ (६.१) |
| पुत्रम् | पुत्र (२.१) |
| अवस्थितम् | अवस्थित (√अव-स्था + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तं | तु | मा | या | प्र | ति | च्छि | न्नं |
| मा | य | यै | व | वि | भी | ष | णः |
| वी | क्ष | मा | णो | द | द | र्शा | थ |
| भ्रा | तुः | पु | त्र | म | व | स्थि | तम् |