अन्वयः
राक्षसेश्वरः Lord of Rakshasas, रावणः Ravana, हृष्टः rejoiced, लङ्काम् Lanka, पताकाध्वजमालिनीम् with rows of flags and posts, कारयामास made decorations, राघवः Raghava, लक्ष्मणश्चैव and Lakshmana, इन्द्रजिता by Indrajith, रणे in war, हतौ killed, प्राघोषयत proclaimed.
Summary
The Lord of Rakshasas rejoiced and went to Lanka decorated with flags and posts proclaiming that Rama and Lakshmana were killed by Indrajith in war.
पदच्छेदः
| प्राघोषयत | प्राघोषयत (√प्र-घोषय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| हृष्टश्च | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.१)–च (अव्ययः) |
| लङ्कायां | लङ्का (७.१) |
| राक्षसेश्वरः | राक्षसेश्वर (१.१) |
| राघवो | राघव (१.१) |
| लक्ष्मणश्चैव | लक्ष्मण (१.१)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| हताविन्द्रजिता | हत (√हन् + क्त, १.२)–इन्द्रजित् (३.१) |
| रणे | रण (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्रा | घो | ष | य | त | हृ | ष्ट | श्च |
| ल | ङ्का | यां | रा | क्ष | से | श्व | रः |
| रा | घ | वो | ल | क्ष्म | ण | श्चै | व |
| ह | ता | वि | न्द्र | जि | ता | र | णे |