पदच्छेदः
| तौ | तद् (२.२) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| भ्रातरौ | भ्रातृ (२.२) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| वीरौ | वीर (२.२) |
| सा | तद् (१.१) |
| पुरुषर्षभौ | पुरुष–ऋषभ (२.२) |
| दुःखार्ता | दुःख–आर्त (१.१) |
| सुभृशं | सु (अव्ययः)–भृशम् (अव्ययः) |
| सीता | सीता (१.१) |
| करुणं | करुण (२.१) |
| विललाप | विललाप (√वि-लप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तौ | दृ | ष्ट्वा | भ्रा | त | रौ | त | त्र |
| वी | रौ | सा | पु | रु | ष | र्ष | भौ |
| दुः | खा | र्ता | सु | भृ | शं | सी | ता |
| क | रु | णं | वि | ल | ला | प | ह |