अन्वयः
रिपुः enemy, मनोजवः who is endowed with speed in thought, स्याद्यद्यपि if seen, रणे in war, राघवस्य by Rama, दृष्टिपथम् range of sight, प्राप्य happens, जीवन् life, नप्रन्तिवर्ततेहि not go alive.
M N Dutt
Coming in battle within ken of Raghava, a foe, even if he be endowed with the fleetness of thought, does not go back living.
Summary
"Even if the enemy is endowed with speed of thought, if he comes in the range of Rama's sight, he will not go alive."
पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| दृष्टिपथं | दृष्टि–पथ (२.१) |
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| राघवस्य | राघव (६.१) |
| रणे | रण (७.१) |
| रिपुः | रिपु (१.१) |
| जीवन् | जीवत् (√जीव् + शतृ, १.१) |
| प्रतिनिवर्तेत | प्रतिनिवर्तेत (√प्रतिनि-वृत् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| यद्यपि | यदि (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| स्यान्मनोजवः | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.)–मनोजव (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | हि | दृ | ष्टि | प | थं | प्रा | प्य |
| रा | घ | व | स्य | र | णे | रि | पुः |
| जी | व | न्प्र | ति | नि | व | र्ते | त |
| य | द्य | पि | स्या | न्म | नो | ज | वः |