अन्वयः
लक्ष्मण Lakshmana, त्वम् you were, नित्यम् always, सुविषण्णम् sad, माम् me, आश्वासयसि comforted, अद्य now, गतासुः ceased of life, आर्तम् grieved, माम् me, अभिभाषितुम् to comfort, शक्तः capable, नासि not.
M N Dutt
O Lakşmaņa, you ever comforts me when I am dispirited. But today, having lost your life, you can not speak to me, who am afflicted.
Summary
"You were always comforting me when I was sad. Now however much I am grieved, ceased of life you cannot comfort me."
पदच्छेदः
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| नित्यं | नित्यम् (अव्ययः) |
| सुविषण्णं | सु (अव्ययः)–विषण्ण (√वि-सद् + क्त, २.१) |
| माम् | मद् (२.१) |
| आश्वासयसि | आश्वासयसि (√आ-श्वासय् लट् म.पु. ) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| गतासुर् | गतासु (१.१) |
| नाद्य | न (अव्ययः)–अद्य (अव्ययः) |
| शक्नोषि | शक्नोषि (√शक् लट् म.पु. ) |
| माम् | मद् (२.१) |
| आर्तम् | आर्त (२.१) |
| अभिभाषितुम् | अभिभाषितुम् (√अभि-भाष् + तुमुन्) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त्वं | नि | त्यं | सु | वि | ष | ण्णं | मा |
| मा | श्वा | स | य | सि | ल | क्ष्म | ण |
| ग | ता | सु | र्ना | द्य | श | क्नो | षि |
| मा | मा | र्त | म | भि | भा | षि | तुम् |