अन्वयः
बाणाभिहतमर्मत्वात् struck in the vital parts by the arrows, अभिभाषितुम् to speak, नशक्नोति, अब्रुवतोऽपि not possible, अस्य his, रुजा anguish, दृष्टिरागेण his looks, सूच्यते indicating.
M N Dutt
In consequence of shafts piercing your vitals, you cannot speak; but your visible expression, albeit you are dumb, betokens pain.
Summary
"Struck in the vital parts by the arrows, it is not possible for you to speak, but your anguish is indicated in your looks."
पदच्छेदः
| बाणाभिहतमर्मत्वान्न | बाण–अभिहत (√अभि-हन् + क्त)–मर्मन्–त्व (५.१)–न (अव्ययः) |
| शक्नोत्यभिवीक्षितुम् | शक्नोति (√शक् लट् प्र.पु. एक.)–अभिवीक्षितुम् (√अभिवि-ईक्ष् + तुमुन्) |
| रुजा | रुज् (३.१) |
| चाब्रुवतो | च (अव्ययः)–अब्रुवत् (६.१) |
| ह्यस्य | हि (अव्ययः)–इदम् (६.१) |
| दृष्टिरागेण | दृष्टि–राग (३.१) |
| सूच्यते | सूच्यते (√सूचय् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| बा | णा | भि | ह | त | म | र्म | त्वा |
| न्न | श | क्नो | त्य | भि | वी | क्षि | तुम् |
| रु | जा | चा | ब्रु | व | तो | ह्य | स्य |
| दृ | ष्टि | रा | गे | ण | सू | च्य | ते |