न चातिक्रमितुं शक्यं दैवं सुग्रीव मानुषैः ।
यत्तु शक्यं वयस्येन सुहृदा वा परंतप ।
कृतं सुग्रीव तत्सर्वं भवताधर्मभीरुणा ॥
न चातिक्रमितुं शक्यं दैवं सुग्रीव मानुषैः ।
यत्तु शक्यं वयस्येन सुहृदा वा परंतप ।
कृतं सुग्रीव तत्सर्वं भवताधर्मभीरुणा ॥
अन्वयः
सुग्रीव Sugriva, मानुषैः in human beings, दैवम् god, अतिक्रमितुम् to overcome, नचशक्यम् not possible, परन्तप scorcher of enemies, सुग्रीव Sugriva, सुहृदा best friend, वयस्येन by you, यत्तु that which, शक्यम् not possible, तत् that, सर्वम् all, धर्मभीरुणा righteously, त्वया by you, कृतम् was done.M N Dutt
But, O Sugriva, man cannot overrule Destiny. You, my friend, fearing righteousness, has done what lay in your power. And, You foremost of monkeys, you also have acted as become friends. Now, with my permission, go you whitersoever you are minded.Summary
"Sugriva! It is not possible for human beings to overcome God (destiny). O scorcher of enemies! Sugriva, my best friend, you have all done righteously that which is not possible."पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| चातिक्रमितुं | च (अव्ययः)–अतिक्रमितुम् (√अति-क्रम् + तुमुन्) |
| शक्यं | शक्य (१.१) |
| दैवं | दैव (१.१) |
| सुग्रीव | सुग्रीव (८.१) |
| मानुषैः | मानुष (३.३) |
| यत् | यद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शक्यं | शक्य (१.१) |
| वयस्येन | वयस्य (३.१) |
| सुहृदा | सुहृद् (३.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| परंतप | परंतप (८.१) |
| कृतं | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| सुग्रीव | सुग्रीव (८.१) |
| तत् | तद् (१.१) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| भवताधर्मभीरुणा | भवत् (३.१)–अधर्म–भीरु (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | चा | ति | क्र | मि | तुं | श | क्यं | दै | वं | सु | ग्री |
| व | मा | नु | षैः | य | त्तु | श | क्यं | व | य | स्ये | न |
| सु | हृ | दा | वा | प | रं | त | प | कृ | तं | सु | ग्री |
| व | त | त्स | र्वं | भ | व | ता | ध | र्म | भी | रु | णा |