ददृशुस्ते महात्मानो वाताहतजलाशयम् ।
अनिलोद्धूतमाकाशे प्रवल्गतमिवोर्मिभिः ।
भ्रान्तोर्मिजलसंनादं प्रलोलमिव सागरम् ॥
ददृशुस्ते महात्मानो वाताहतजलाशयम् ।
अनिलोद्धूतमाकाशे प्रवल्गतमिवोर्मिभिः ।
भ्रान्तोर्मिजलसंनादं प्रलोलमिव सागरम् ॥
M N Dutt
There beheld those high-souled monkeys the mighty main agitated by the Wind and muttering as if with the Upheaval of the waves.पदच्छेदः
| ददृशुस्ते | ददृशुः (√दृश् लिट् प्र.पु. बहु.)–तद् (१.३) |
| महात्मानो | महात्मन् (१.३) |
| वाताहतजलाशयम् | वात–आहत (√आ-हन् + क्त)–जलाशय (२.१) |
| अनिलोद्धूतम् | अनिल–उद्धूत (√उत्-धू + क्त, २.१) |
| आकाशे | आकाश (७.१) |
| प्रवल्गन्तम् | प्रवल्गत् (√प्र-वल्ग् + शतृ, २.१) |
| इवोर्मिभिः | इव (अव्ययः)–ऊर्मि (३.३) |
| भ्रान्तोर्मिजलसंनादं | भ्रान्त (√भ्रम् + क्त)–ऊर्मि–जल–संनाद (२.१) |
| प्रलोलम् | प्रलोल (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| सागरम् | सागर (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | दृ | शु | स्ते | म | हा | त्मा | नो | वा | ता | ह | त |
| ज | ला | श | यम् | अ | नि | लो | द्धू | त | मा | का | शे |
| प्र | व | ल्ग | त | मि | वो | र्मि | भिः | भ्रा | न्तो | र्मि | ज |
| ल | सं | ना | दं | प्र | लो | ल | मि | व | सा | ग | रम् |