अन्वयः
महाघोरात् frightful, अस्मात् to you, सायकबन्धनात् from the bondage of snakes, मोक्षितौच and to relieve, युवाभ्याम् both of you, नित्यमेवच guilelessness, अप्रमादः inattentive, कर्तव्यः your duty.
Summary
"Considering it as my duty to relieve you both from the frightful bondage of snakes I reached. Do not be inattentive and guileless."
पदच्छेदः
| मोक्षितौ | मोक्षित (√मोक्षय् + क्त, १.२) |
| च | च (अव्ययः) |
| महाघोराद् | महत्–घोर (५.१) |
| अस्मात् | इदम् (५.१) |
| सायकबन्धनात् | सायक–बन्धन (५.१) |
| अप्रमादश्च | अप्रमाद (१.१)–च (अव्ययः) |
| कर्तव्यो | कर्तव्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| युवाभ्यां | त्वद् (३.२) |
| नित्यम् | नित्यम् (अव्ययः) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| मो | क्षि | तौ | च | म | हा | घो | रा |
| द | स्मा | त्सा | य | क | ब | न्ध | नात् |
| अ | प्र | मा | द | श्च | क | र्त | व्यो |
| यु | वा | भ्यां | नि | त्य | मे | व | हि |