अन्वयः
महाबलः mighty strong, सःसुपर्णः that Suparna, तदा then, रामम् to Rama, एवम् in that way, उक्त्वा having said, सुहृत्स्निग्धम् most affectionately, परिष्वज्यच embracing, अप्रष्टुम् took leave, उपचक्रमे and proceeded.
M N Dutt
Having said this the wondrous mighty Suparna, embracing Rama tenderly again) said.
Summary
Having said so, Suparna endowed with mighty strength embraced Rama most affectionately and took leave of him.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| रामं | राम (२.१) |
| सुपर्णः | सुपर्ण (१.१) |
| सुमहाबलः | सु (अव्ययः)–महत्–बल (१.१) |
| परिष्वज्य | परिष्वज्य (√परि-स्वज् + ल्यप्) |
| सुहृत्स्निग्धम् | सुहृद्–स्निग्ध (२.१) |
| आप्रष्टुम् | आप्रष्टुम् (√आ-प्रच्छ् + तुमुन्) |
| उपचक्रमे | उपचक्रमे (√उप-क्रम् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त्वा | त | तो | रा | मं |
| सु | प | र्णः | सु | म | हा | ब | लः |
| प | रि | ष्व | ज्य | सु | हृ | त्स्नि | ग्ध |
| मा | प्र | ष्टु | मु | प | च | क्र | मे |