ततो भेरीः समाजघ्नुर्मृदङ्गांश्च व्यनादयन् ।
दध्मुः शङ्खान्संप्रहृष्टाः क्ष्वेलन्त्यपि यथापुरम् ॥
ततो भेरीः समाजघ्नुर्मृदङ्गांश्च व्यनादयन् ।
दध्मुः शङ्खान्संप्रहृष्टाः क्ष्वेलन्त्यपि यथापुरम् ॥
अन्वयः
ततः and then, भेरीः drums, समाजघ्नुः played, मृदङ्गांश्चापि even mridangams, अवादयन् played, शङ्खान् conches, दध्मुः blew, यथापुरम् as before, क्षेवलन्त्यपि leap and jump.M N Dutt
Then beat the kettle-drums and the drums struck up. And conchs were cheerfully blown; and shouts were sent.Summary
Then the Vanaras played drums and even mridangams, blew conches and started jumping and leaping as before.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| भेरीः | भेरी (२.३) |
| समाजघ्नुर् | समाजघ्नुः (√समा-हन् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| मृदङ्गांश्च | मृदङ्ग (२.३)–च (अव्ययः) |
| व्यनादयन् | व्यनादयन् (√वि-नादय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| दध्मुः | दध्मुः (√धम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| शङ्खान् | शङ्ख (२.३) |
| सम्प्रहृष्टाः | सम्प्रहृष्ट (√सम्प्र-हृष् + क्त, १.३) |
| क्ष्वेडन्त्यपि | क्ष्वेडन्ति (√क्ष्विड् लट् प्र.पु. बहु.)–अपि (अव्ययः) |
| यथापुरम् | यथापुरम् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | भे | रीः | स | मा | ज | घ्नु |
| र्मृ | द | ङ्गां | श्च | व्य | ना | द | यन् |
| द | ध्मुः | श | ङ्खा | न्सं | प्र | हृ | ष्टाः |
| क्ष्वे | ल | न्त्य | पि | य | था | पु | रम् |