ववर्ष रुधिरं देवः संचचाल च मेदिनी ।
प्रतिलोमं ववौ वायुर्निर्घातसमनिस्वनः ।
तिमिरौघावृतास्तत्र दिशश्च न चकाशिरे ॥
ववर्ष रुधिरं देवः संचचाल च मेदिनी ।
प्रतिलोमं ववौ वायुर्निर्घातसमनिस्वनः ।
तिमिरौघावृतास्तत्र दिशश्च न चकाशिरे ॥
अन्वयः
निर्घातसमनिस्वनः thunder like roar, वायुः wind, प्रतिलोमम् adversely, ववौ blew, तत्र there, दिशः directions, तिमिरौघवृताः darkness pervaded, नचकाशिरे directions could not be discerned.M N Dutt
That god* showered down blood; and the earth shook. And the wind blew awry with a sound resembling thunder. And every side, covered with darkness, appeared dim. *Indra-cloud compeller.Summary
Thunder like roar was heard. Wind blew adversely. Darkness pervaded, and directions could not be seen.पदच्छेदः
| ववर्ष | ववर्ष (√वृष् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रुधिरं | रुधिर (२.१) |
| देवः | देव (१.१) |
| संचचाल | संचचाल (√सम्-चल् लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| मेदिनी | मेदिनी (१.१) |
| प्रतिलोमं | प्रतिलोम (२.१) |
| ववौ | ववौ (√वा लिट् प्र.पु. एक.) |
| वायुर् | वायु (१.१) |
| निर्घातसमनिस्वनः | निर्घात–सम–निस्वन (१.१) |
| तिमिरौघावृतास्तत्र | तिमिर–ओघ–आवृत (√आ-वृ + क्त, १.३)–तत्र (अव्ययः) |
| दिशश्च | दिश् (१.३)–च (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| चकाशिरे | चकाशिरे (√काश् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | व | र्ष | रु | धि | रं | दे | वः | सं | च | चा | ल |
| च | मे | दि | नी | प्र | ति | लो | मं | व | वौ | वा | यु |
| र्नि | र्घा | त | स | म | नि | स्व | नः | ति | मि | रौ | घा |
| वृ | ता | स्त | त्र | दि | श | श्च | न | च | का | शि | रे |