स तां विधूमानलसंनिकाशां; वित्रासनीं वानरवाहिनीनाम् ।
चिक्षेप शक्तिं तरसा ज्वलन्तीं; सौमित्रये राक्षसराष्ट्रनाथः ॥
स तां विधूमानलसंनिकाशां; वित्रासनीं वानरवाहिनीनाम् ।
चिक्षेप शक्तिं तरसा ज्वलन्तीं; सौमित्रये राक्षसराष्ट्रनाथः ॥
अन्वयः
राक्षसराष्ट्रनाथः Lord of the world of Rakshasas, सः he, सधूमानलसन्निकाशाम् like fire without smoke, संयति similar, वानराणाम् Vanaras, वित्रासनीम् create fear, ज्वलन्तीम् emitting fire, तांशक्तिम् that javelin, तरसा instantly, सौमित्रये on Saumithri, चिक्षेप flung.M N Dutt
The sovereign of the Rākşasas and their lord in that encounter hurled at Sumitrā's son the dart resembling smoking fire, sending up living flames, and striking terror into the monkeys.Summary
The Lord of the world of Rakshasas instantly flung javelin, emitting fire without smoke, on Saumithri, which created fear among Vanaras.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| विधूमानलसंनिकाशां | विधूम–अनल–संनिकाश (२.१) |
| वित्रासनीं | वित्रासन (२.१) |
| वानरवाहिनीनाम् | वानर–वाहिनी (६.३) |
| चिक्षेप | चिक्षेप (√क्षिप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शक्तिं | शक्ति (२.१) |
| तरसा | तरस् (३.१) |
| ज्वलन्तीं | ज्वलत् (√ज्वल् + शतृ, २.१) |
| सौमित्रये | सौमित्रि (४.१) |
| राक्षसराष्ट्रनाथः | राक्षस–राष्ट्र–नाथ (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | तां | वि | धू | मा | न | ल | सं | नि | का | शां |
| वि | त्रा | स | नीं | वा | न | र | वा | हि | नी | नाम् |
| चि | क्षे | प | श | क्तिं | त | र | सा | ज्व | ल | न्तीं |
| सौ | मि | त्र | ये | रा | क्ष | स | रा | ष्ट्र | ना | थः |