तामापतन्तीं भरतानुजोऽस्त्रै;र्जघान बाणैश्च हुताग्निकल्पैः ।
तथापि सा तस्य विवेश शक्ति;र्भुजान्तरं दाशरथेर्विशालम् ॥
तामापतन्तीं भरतानुजोऽस्त्रै;र्जघान बाणैश्च हुताग्निकल्पैः ।
तथापि सा तस्य विवेश शक्ति;र्भुजान्तरं दाशरथेर्विशालम् ॥
अन्वयः
भरतानुजः Bharata's brother, Lakshmana, अपतन्तीम् coming towards, ताम् that, अस्त्रै: weapon, हुताग्निकल्पैः with shafts like flames of fire fuelled by ghee, बाणैश्च dart, जघान coming, तथापि even so, साशक्तिः that javelin, दाशरथेः Lakshmana, विशालम् broad, भुजान्तरम् chest, विवेश entered.M N Dutt
As it coursed on, Bharata's younger brother resisted it with arrows resembling a sacrificial flame. Yet the dart pierced into the broad arm of Dasaratha's son.Summary
Lakshmana, the brother of Bharata struck the fierce weapon coming towards him like flames of fire fuelled by ghee, even then it struck him on his broad chest.पदच्छेदः
| ताम् | तद् (२.१) |
| आपतन्तीं | आपतत् (√आ-पत् + शतृ, २.१) |
| भरतानुजो | भरत–अनुज (१.१) |
| ऽस्त्रैर् | अस्त्र (३.३) |
| जघान | जघान (√हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| बाणैश्च | बाण (३.३)–च (अव्ययः) |
| हुताग्निकल्पैः | हुत (√हु + क्त)–अग्नि–कल्प (३.३) |
| तथापि | तथा (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| सा | तद् (१.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| विवेश | विवेश (√विश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शक्तिर् | शक्ति (१.१) |
| भुजान्तरं | भुजान्तर (२.१) |
| दाशरथेर् | दाशरथि (६.१) |
| विशालम् | विशाल (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | मा | प | त | न्तीं | भ | र | ता | नु | जो | ऽस्त्रै |
| र्ज | घा | न | बा | णै | श्च | हु | ता | ग्नि | क | ल्पैः |
| त | था | पि | सा | त | स्य | वि | वे | श | श | क्ति |
| र्भु | जा | न्त | रं | दा | श | र | थे | र्वि | शा | लम् |