यदीन्द्रवैवस्वत भास्करान्वा; स्वयम्भुवैश्वानरशंकरान्वा ।
गमिष्यसि त्वं दश वा दिशो वा; तथापि मे नाद्य गतो विमोक्ष्यसे ॥
यदीन्द्रवैवस्वत भास्करान्वा; स्वयम्भुवैश्वानरशंकरान्वा ।
गमिष्यसि त्वं दश वा दिशो वा; तथापि मे नाद्य गतो विमोक्ष्यसे ॥
अन्वयः
इन्द्रवैवस्वतभास्करान्वा either to Indra, or Yama or sun god, स्वयम्भुवैश्वानरशंकरान्वा to selfborn Brahma or to fire god or Shankara, दशवा ten, दिशोवा directions, त्वम् you, गमिष्यसियदि even if you run, तथापि like that, अद्य front, मे of me, गतः gone, नविमोक्ष्यसे not escape.M N Dutt
Even if you should seek Yama or Indra or the Sun-son to Vivaśvăn-or the Self-sprung or the Fire-god or Sankara himself, or go to the ten cardinal points in ten portions, yet shall you not, so resorting attain deliverance.Summary
"If you go to Indra or Yama or Sun God or the selfborn Brahma or fire God or Shankara or the ten directions like that, and if you run in front of me you cannot escape."पदच्छेदः
| यदीन्द्रवैवस्वतभास्करान् | यदि (अव्ययः)–इन्द्र–वैवस्वत–भास्कर (२.३) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| स्वयम्भुवैश्वानरशंकरान् | स्वयम्भु–वैश्वानर–शंकर (२.३) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| गमिष्यसि | गमिष्यसि (√गम् लृट् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| दश | दशन् (२.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| दिशो | दिश् (२.३) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| तथापि | तथा (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| नाद्य | न (अव्ययः)–अद्य (अव्ययः) |
| गतो | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| विमोक्ष्यसे | विमोक्ष्यसे (√वि-मुच् लृट् म.पु. ) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | दी | न्द्र | वै | व | स्व | त | भा | स्क | रा | न्वा | |
| स्व | य | म्भु | वै | श्वा | न | र | शं | क | रा | न्वा | |
| ग | मि | ष्य | सि | त्वं | द | श | वा | दि | शो | वा | |
| त | था | पि | मे | ना | द्य | ग | तो | वि | मो | क्ष्य | से |
| ज | त | ज | ग | ग | |||||||