यो वज्रपाताशनिसंनिपाता;न्न चुक्षुभे नापि चचाल राजा ।
स रामबाणाभिहतो भृशार्त;श्चचाल चापं च मुमोच वीरः ॥
यो वज्रपाताशनिसंनिपाता;न्न चुक्षुभे नापि चचाल राजा ।
स रामबाणाभिहतो भृशार्त;श्चचाल चापं च मुमोच वीरः ॥
अन्वयः
यः he, राजा king, वज्रपाताशनिसन्निपातात् one who is not disturbed hit by thunderbolt or by lightning, नचुक्षुभे not disturbed, नापिचचाल arrow, सः he, वीरः hero, रामबाणाभिहतः struck by Rama's arrow, भृशार्तः reeled, चचाल agonized, चापंच bow also, मुमोच let go.M N Dutt
That the king hero-who had not smarted nor shaken under the impetus of Vajra and the thunder-bolt, assailed with the arrows of Răma and agonised in consequence, shock and lost hold of his bow.Summary
He, that heroic king, who was not disturbed hurt by thunderbolt of lightning, was agonized when struck by Rama's arrow and let his bow fall.पदच्छेदः
| यो | यद् (१.१) |
| वज्रपाताशनिसंनिपातान् | वज्र–पात–अशनि–संनिपात (५.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| चुक्षुभे | चुक्षुभे (√क्षुभ् लिट् प्र.पु. एक.) |
| नापि | न (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| चचाल | चचाल (√चल् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| रामबाणाभिहतो | राम–बाण–अभिहत (√अभि-हन् + क्त, १.१) |
| भृशार्तश् | भृश–आर्त (१.१) |
| चचाल | चचाल (√चल् लिट् प्र.पु. एक.) |
| चापं | चाप (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मुमोच | मुमोच (√मुच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वीरः | वीर (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यो | व | ज्र | पा | ता | श | नि | सं | नि | पा | ता |
| न्न | चु | क्षु | भे | ना | पि | च | चा | ल | रा | जा |
| स | रा | म | बा | णा | भि | ह | तो | भृ | शा | र्त |
| श्च | चा | ल | चा | पं | च | मु | मो | च | वी | रः |