संख्ये प्रहस्तं निहतं निशम्य; शोकार्दितः क्रोधपरीतचेताः ।
उवाच तान्नैरृतयोधमुख्या;निन्द्रो यथा चामरयोधमुख्यान् ॥
संख्ये प्रहस्तं निहतं निशम्य; शोकार्दितः क्रोधपरीतचेताः ।
उवाच तान्नैरृतयोधमुख्या;निन्द्रो यथा चामरयोधमुख्यान् ॥
अन्वयः
सङ् ख्ये relating to, प्रहस्तम् Prahastha, निहतम् death, निशम्य revealed, शोकार्दितः sorrowful, क्रोधपरीतचेताः tormented with anger, इन्द्रः Indra, निर्जरयोथमुख्याविव commanders of celestial troops, तान् to them, राक्षसयूथमुख्यान् to the Rakshasa troops, उवाच said.M N Dutt
And hearing that Prahasta had been killed in battle (he), exercised with passion, with his heart influenced with grief, addressed those foremost of the Raksasas host, even as Indra addressed the chiefs among the celestials, sayingSummary
Even as Rakshasas revealed about Prahastha's death, tormented by grief and anger Ravana spoke to Rakshasa troops just as Indra spoke to celestial troops.पदच्छेदः
| संख्ये | संख्य (७.१) |
| प्रहस्तं | प्रहस्त (२.१) |
| निहतं | निहत (√नि-हन् + क्त, २.१) |
| निशम्य | निशम्य (√नि-शामय् + ल्यप्) |
| शोकार्दितः | शोक–अर्दित (√अर्दय् + क्त, १.१) |
| क्रोधपरीतचेताः | क्रोध–परीत (√परि-इ + क्त)–चेतस् (१.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तान्नैरृतयोधमुख्यान् | तद् (२.३)–नैरृत–योध–मुख्य (२.३) |
| इन्द्रो | इन्द्र (१.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| चामरयोधमुख्यान् | च (अव्ययः)–अमर–योध–मुख्य (२.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | ख्ये | प्र | ह | स्तं | नि | ह | तं | नि | श | म्य |
| शो | का | र्दि | तः | क्रो | ध | प | री | त | चे | ताः |
| उ | वा | च | ता | न्नै | रृ | त | यो | ध | मु | ख्या |
| नि | न्द्रो | य | था | चा | म | र | यो | ध | मु | ख्यान् |