विसर्जयित्वा सहसा ततस्ता;न्गतेषु रक्षःसु यथानियोगम् ।
व्यदारयद्वानरसागरौघं; महाझषः पूर्ममिवार्णवौघम् ॥
विसर्जयित्वा सहसा ततस्ता;न्गतेषु रक्षःसु यथानियोगम् ।
व्यदारयद्वानरसागरौघं; महाझषः पूर्ममिवार्णवौघम् ॥
अन्वयः
तान् them, सचिवान् counsellors, विसर्जयित्वा sent away, ततः there upon, रक्षःसु Rakshasa, यथानियोगम् as instructed, गतेषु having departed, वानरसागरौघम् ocean of Vanaras, महाझषः gigantic fish, पूर्णम् totally, अर्णवौघम् इव like the war in the ocean, व्यदारयत् pierced through.M N Dutt
Then leaving those counsellors, (Ravana) on the Raksasa having departed agreeably to his injunction, dived into that ocean of monkeys, like a mighty fish diving into the waves of over brimming deep.Summary
After the counsellors departed from there Ravana pierced through the ocean of Vanaras just as gigantic fish would pierce in the sea.पदच्छेदः
| विसर्जयित्वा | विसर्जयित्वा (√वि-सर्जय् + ल्यप्) |
| सहसा | सहस् (३.१) |
| ततस्तान् | ततस् (अव्ययः)–तद् (२.३) |
| गतेषु | गत (√गम् + क्त, ७.३) |
| रक्षःसु | रक्षस् (७.३) |
| यथानियोगम् | यथा (अव्ययः)–नियोग (२.१) |
| व्यदारयद् | व्यदारयत् (√वि-दारय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| वानरसागरौघं | वानर–सागर–ओघ (२.१) |
| महाझषः | महत्–झष (१.१) |
| पूर्णम् | पूर्ण (√पृ + क्त, २.१) |
| इवार्णवौघम् | इव (अव्ययः)–अर्णव–ओघ (२.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | स | र्ज | यि | त्वा | स | ह | सा | त | त | स्ता |
| न्ग | ते | षु | र | क्षः | सु | य | था | नि | यो | गम् |
| व्य | दा | र | य | द्वा | न | र | सा | ग | रौ | घं |
| म | हा | झ | षः | पू | र्म | मि | वा | र्ण | वौ | घम् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||