ततो गवाक्षो गवयः सुदंष्ट्र;स्तथर्षभो ज्योतिमुखो नलश्च ।
शैलान्समुद्यम्य विवृद्धकायाः; प्रदुद्रुवुस्तं प्रति राक्षसेन्द्रम् ॥
ततो गवाक्षो गवयः सुदंष्ट्र;स्तथर्षभो ज्योतिमुखो नलश्च ।
शैलान्समुद्यम्य विवृद्धकायाः; प्रदुद्रुवुस्तं प्रति राक्षसेन्द्रम् ॥
अन्वयः
ततः thereafter, गवाक्षः Gavaksha, गवयः Gavaya, सुदंष्ट्र Sudamshtra, अथ and, ऋषभः Rshaba, ज्योतिमुखः Jyothimukha, नलश्च Nala, शैलान् rock, समुत्पाट्य taking mountains, विवृद्धकायाः raising their body size, तम् they, राक्षसेन्द्रंप्रति over the king of Rakshasas, प्रदुद्रुवुः rushed.M N Dutt
Then Gavaksa and Gavaya, Susena, Rsabha, Jyotimukha and Nala, uprooting crags and magnifying their bodies, rushed against the lord of Raksasas.Summary
Thereafter Gavaksha, Gavaya, Sudamshtra, Rshaba, Jyothimukha and Nala increasing their body size rushed towards the king of Rakshasas.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| गवाक्षो | गवाक्ष (१.१) |
| गवयः | गवय (१.१) |
| सुदंष्ट्रस् | सुदंष्ट्र (१.१) |
| तथर्षभो | तथा (अव्ययः)–ऋषभ (१.१) |
| ज्योतिमुखो | ज्योतिर्मुख (१.१) |
| नलश्च | नल (१.१)–च (अव्ययः) |
| शैलान् | शैल (२.३) |
| समुद्यम्य | समुद्यम्य (√समुत्-यम् + ल्यप्) |
| विवृद्धकायाः | विवृद्ध (√वि-वृध् + क्त)–काय (१.३) |
| प्रदुद्रुवुस्तं | प्रदुद्रुवुः (√प्र-द्रु लिट् प्र.पु. बहु.)–तद् (२.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
| राक्षसेन्द्रम् | राक्षस–इन्द्र (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ग | वा | क्षो | ग | व | यः | सु | दं | ष्ट्र |
| स्त | थ | र्ष | भो | ज्यो | ति | मु | खो | न | ल | श्च |
| शै | ला | न्स | मु | द्य | म्य | वि | वृ | द्ध | का | याः |
| प्र | दु | द्रु | वु | स्तं | प्र | ति | रा | क्ष | से | न्द्रम् |