ततो महात्मा स धनुर्धनुष्मा;नादाय रामः सहरा जगाम ।
तं लक्ष्मणः प्राञ्जलिरभ्युपेत्य; उवाच वाक्यं परमार्थयुक्तम् ॥
ततो महात्मा स धनुर्धनुष्मा;नादाय रामः सहरा जगाम ।
तं लक्ष्मणः प्राञ्जलिरभ्युपेत्य; उवाच वाक्यं परमार्थयुक्तम् ॥
अन्वयः
ततः that, महात्मा great soul, धनुष्मान् holding bow, सःरामः that Rama, धनुः bow, आदाय taking, सहसा immediately, जगाम went, लक्ष्मणः Lakshmana, तम् him, अभ्युपेत्य addressed, प्राञ्जलिः with folded hand s, परमार्थयुक्तम् consonant with truth, वाक्यम् words, उवाच spoken.Summary
The great soul Rama who was holding a bow went seizing it. Lakshmana approached him immediately with folded hands and addressed Rama with words consonant with truth.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| महात्मा | महात्मन् (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| धनुर् | धनुस् (२.१) |
| धनुष्मान् | धनुष्मत् (१.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| रामः | राम (१.१) |
| सहसा | सहस् (३.१) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तं | तद् (२.१) |
| लक्ष्मणः | लक्ष्मण (१.१) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| अभ्युपेत्य | अभ्युपेत्य (√अभ्युप-इ + ल्यप्) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| परमार्थयुक्तम् | परम–अर्थ–युक्त (√युज् + क्त, २.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | म | हा | त्मा | स | ध | नु | र्ध | नु | ष्मा |
| ना | दा | य | रा | मः | स | ह | रा | ज | गा | म |
| तं | ल | क्ष्म | णः | प्रा | ञ्ज | लि | र | भ्यु | पे | त्य |
| उ | वा | च | वा | क्यं | प | र | मा | र्थ | यु | क्तम् |