६.४७.७६

पावकात्मजमालोक्य ध्वजाग्रे समवस्थितम् ।
जज्वाल रावणः क्रोधात्ततो नीलो ननाद ह ॥

अन्वयः

ध्वजाग्रे on top of the post of bow, समवस्थितम् standing, पावकात्मजम् son of fire god, आलोक्य seeing, रावणः Ravana, क्रोधात् in anger, जज्वाल burning, ततः then, नीलः Neela, ननादच roared.

M N Dutt

Seeing the son of the Fire-god descend on the top of his banner. Råvana was fired with ire, and Nila shouted (thereat).

Summary

Neela stood on top of the post of the bow of Ravana. On seeing that Ravana was burning in anger while Neela roared.

पदच्छेदः

पावकात्मजम्पावकात्मज (२.१)
आलोक्यआलोक्य (√आ-लोकय् + ल्यप्)
ध्वजाग्रेध्वज–अग्र (७.१)
समवस्थितम्समवस्थित (√समव-स्था + क्त, २.१)
जज्वालजज्वाल (√ज्वल् लिट् प्र.पु. एक.)
रावणःरावण (१.१)
क्रोधात्क्रोध (५.१)
ततोततस् (अव्ययः)
नीलोनील (१.१)
ननादननाद (√नद् लिट् प्र.पु. एक.)
(अव्ययः)

छन्दः

अनुष्टुप् [८]

छन्दोविश्लेषणम्

पा कात्म मा लोक्य
ध्व जा ग्रेस्थि तम्
ज्वा रा णः क्रो धा
त्त तो नी लो ना