तमाह सौमित्रिरदीनसत्त्वो; विस्फारयन्तं धनुरप्रमेयम् ।
अन्वेहि मामेव निशाचरेन्द्र; न वानरांस्त्वं प्रति योद्धुमर्हसि ॥
तमाह सौमित्रिरदीनसत्त्वो; विस्फारयन्तं धनुरप्रमेयम् ।
अन्वेहि मामेव निशाचरेन्द्र; न वानरांस्त्वं प्रति योद्धुमर्हसि ॥
अन्वयः
अदीनसत्त्वः not depressed in spirit, सौमित्रिः Saumithri, अप्रमेयम् immeasurable, धनुः bow, विष्फारयन्तम् stretching, तम् him, आह Oh, निशाचरेन्द्र Lord of night rangers, माम् me, अभ्येहि aware, त्वम् you, वानरान् Vanaras, प्रतियोद्धुम् fighting war, अर्हः you ought not.M N Dutt
As that one of immeasurable prowess kept stretching his bow. And as that one of immeasurable prowess kept stretching his bow, Sumitrā's son of unflagging mettle, addressed him saying, “O lord of night-rangers, do you today try me in encounter. You ought not to strive with the monkeys."Summary
Saumithri who was not depressed in spirit (by Ravana's attack) addressing Ravana who was stretching his bow said "Oh! Lord of night rangers, Be aware. You ought not to fight with vanaras."पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| आह | आह (√अह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सौमित्रिर् | सौमित्रि (१.१) |
| अदीनसत्त्वो | अदीन–सत्त्व (१.१) |
| विस्फारयन्तं | विस्फारयत् (√वि-स्फारय् + शतृ, २.१) |
| धनुर् | धनुस् (२.१) |
| अप्रमेयम् | अप्रमेय (२.१) |
| अन्वेहि | अन्वेहि (√अन्वा-इ लोट् म.पु. ) |
| माम् | मद् (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| निशाचरेन्द्र | निशाचर–इन्द्र (८.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| वानरांस्त्वं | वानर (२.३)–त्वद् (१.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
| योद्धुम् | योद्धुम् (√युध् + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | मा | ह | सौ | मि | त्रि | र | दी | न | स | त्त्वो | |
| वि | स्फा | र | य | न्तं | ध | नु | र | प्र | मे | यम् | |
| अ | न्वे | हि | मा | मे | व | नि | शा | च | रे | न्द्र | |
| न | वा | न | रां | स्त्वं | प्र | ति | यो | द्धु | म | र्ह | सि |
| त | त | ज | ग | ग | |||||||