जानामि वीर्यं तव राक्षसेन्द्र; बलं प्रतापं च पराक्रमं च ।
अवस्थितोऽहं शरचापपाणि;रागच्छ किं मोघविकत्थनेन ॥
जानामि वीर्यं तव राक्षसेन्द्र; बलं प्रतापं च पराक्रमं च ।
अवस्थितोऽहं शरचापपाणि;रागच्छ किं मोघविकत्थनेन ॥
अन्वयः
राक्षसेन्द्र Rakshasa king तव your, वीर्यम् valour, बलम् strength, प्रतापंच and heroism, पराक्रमंच and prowess, जानामि not known to me, अहम् I am, शरचापपाणिः arrow and bow in hand, अवस्थितः stand firmly, आगच्छ come on, मोघविकत्थेन by bragging, किम What.M N Dutt
O lord of Raksasas, I know your prowess and strength and energy and vigour. Here am I stationed, bow and shafts in hand. Come you. What is the use of vain-glorious self-laudation?Summary
"Your valour, heroism, strength and prowess are known to me. I stand firmly with bow and arrow come on. What is the use of bragging"पदच्छेदः
| जानामि | जानामि (√ज्ञा लट् उ.पु. ) |
| वीर्यं | वीर्य (२.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| राक्षसेन्द्र | राक्षस–इन्द्र (८.१) |
| बलं | बल (२.१) |
| प्रतापं | प्रताप (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| पराक्रमं | पराक्रम (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| अवस्थितो | अवस्थित (√अव-स्था + क्त, १.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| शरचापपाणिर् | शर–चाप–पाणि (१.१) |
| आगच्छ | आगच्छ (√आ-गम् लोट् म.पु. ) |
| किं | क (२.१) |
| मोघविकत्थनेन | मोघ–विकत्थन (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| जा | ना | मि | वी | र्यं | त | व | रा | क्ष | से | न्द्र |
| ब | लं | प्र | ता | पं | च | प | रा | क्र | मं | च |
| अ | व | स्थि | तो | ऽहं | श | र | चा | प | पा | णि |
| रा | ग | च्छ | किं | मो | घ | वि | क | त्थ | ने | न |