अन्वयः
मन्त्रयित्वा deliberating like this, अयम् I am, इतः here, नवमे nine, अहनि day and night, प्रसुप्तः sleeping, महाबलम् great strength, तंकुम्बकुर्णम् that Kumbhakarna, क्षिप्रम् quickly, बोधयत may be informed
Summary
"Deliberating like this with me, Kumbhakarna is sleeping for the ninth day from now. He may be quickly informed (aroused)."
पदच्छेदः
| नव | नवन् (२.१) |
| षट् | षष् (२.३) |
| सप्त | सप्तन् (२.१) |
| चाष्टौ | च (अव्ययः)–अष्टन् (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| मासान् | मास (२.३) |
| स्वपिति | स्वपिति (√स्वप् लट् प्र.पु. एक.) |
| राक्षसः | राक्षस (१.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| बोधयत | बोधयत (√बोधय् लोट् म.पु. द्वि.) |
| क्षिप्रं | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| कुम्भकर्णं | कुम्भकर्ण (२.१) |
| महाबलम् | महत्–बल (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| न | व | ष | ट्स | प्त | चा | ष्टौ | च |
| मा | सा | न्स्व | पि | ति | रा | क्ष | सः |
| तं | तु | बो | ध | य | त | क्षि | प्रं |
| कु | म्भ | क | र्णं | म | हा | ब | लम् |