अन्वयः
यातुधानाः incense, धूपम् burnt, गन्धाम् च sandal, ससृजुः to send forth, परन्तपम् supreme, तुष्टवुश्च to gratify, ततस्ततः here and there, जलदाःइव like clouds, आनेदुःच thundered.
Summary
They also burnt incense, sandal to send forth fragrance to gratify Kumbhakarna and thundered like clouds here and there.
पदच्छेदः
| धूपं | धूप (२.१) |
| सुगन्धं | सुगन्ध (२.१) |
| ससृजुस्तुष्टुवुश्च | ससृजुः (√सृज् लिट् प्र.पु. बहु.)–तुष्टुवुः (√स्तु लिट् प्र.पु. बहु.)–च (अव्ययः) |
| परंतपम् | परंतप (२.१) |
| जलदा | जलद (१.३) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| चोन्नेदुर् | च (अव्ययः)–उन्नेदुः (√उत्-नद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| यातुधानाः | यातुधान (१.३) |
| सहस्रशः | सहस्रशस् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| धू | पं | सु | ग | न्धं | स | सृ | जु |
| स्तु | ष्टु | वु | श्च | प | रं | त | पम् |
| ज | ल | दा | इ | व | चो | ने | दु |
| र्या | तु | धा | नाः | स | ह | स्र | शः |