अन्वयः
अस्य his, गात्राणि voice, माहाकाष्ठकङ्करैः with heavy logs of wood, सर्वप्राणसमुद्यतैः with all their strength, मुसलैश्चापि with mallets, निजघ्नुः not wake up.
Summary
The city of Lanka including the woods was filled with that noise. They pushed him with mallets with all their strength, but he did not wake up.
पदच्छेदः
| निजघ्नुश्चास्य | निजघ्नुः (√नि-हन् लिट् प्र.पु. बहु.)–च (अव्ययः)–इदम् (६.१) |
| गात्राणि | गात्र (२.३) |
| मुद्गरैर् | मुद्गर (३.३) |
| मुसलैश्चैव | मुसल (३.३)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| सर्वप्राणसमुद्यतैः | सर्व–प्राण–समुद्यत (√समुत्-यम् + क्त, ३.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नि | ज | घ्नु | श्चा | स्य | गा | त्रा | णि |
| म | हा | का | ष्ठ | क | टं | क | रैः |
| मु | द्ग | रै | र्मु | स | लै | श्चै | व |
| स | र्व | प्रा | ण | स | मु | द्य | तैः |