अन्वयः
सःरावणः Ravana, काञ्चनमयम् golden, दिव्यम् wonderful, परमासनम् magnificent, आश्रित्य seated, रक्षांसि at Rakshasas, विप्रेक्षमाणः gazing at, वाक्यम् words, अब्रवीत् spoke.
M N Dutt
Rāma, seated on a superb golden seat and eyeing the Raksasas, spoke this word.
Summary
Ravana seated on the wonderful golden magnificent throne gazing at Rakshasas spoke these words.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| काञ्चनमयं | काञ्चन–मय (२.१) |
| दिव्यम् | दिव्य (२.१) |
| आश्रित्य | आश्रित्य (√आ-श्रि + ल्यप्) |
| परमासनम् | परम–आसन (२.१) |
| विप्रेक्षमाणो | विप्रेक्षमाण (√विप्र-ईक्ष् + शानच्, १.१) |
| रक्षांसि | रक्षस् (२.३) |
| रावणो | रावण (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | का | ञ्च | न | म | यं | दि | व्य |
| मा | श्रि | त्य | प | र | मा | स | नम् |
| वि | क्प्रे | क्ष | मा | णो | र | क्षां | सि |
| रा | व | णो | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |