अन्वयः
एवमपि like that, शासस्य because of curse, वशम् under the spell of, आपन्नः wrap, अन्तिद्रिः, यदा like that, नैवप्रबुध्यते not wakened, ततः then, निशाचराः Rakshasas, क्रुद्धाः enraged.
M N Dutt
And coming under the sway of the curse, when that one sunk in slumber did not wake up, the night-rangers were wrought up with wrath.
Summary
Wrapped in sleep like that because of the spell of the curse, he had not wakened. The Rakshasas got enraged.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| अप्यतिनिद्रस्तु | अपि (अव्ययः)–अति (अव्ययः)–निद्रा (१.१)–तु (अव्ययः) |
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| नैव | न (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| प्रबुध्यत | प्रबुध्यत (√प्र-बुध् लङ् प्र.पु. एक.) |
| शापस्य | शाप (६.१) |
| वशम् | वश (२.१) |
| आपन्नस्ततः | आपन्न (√आ-पद् + क्त, १.१)–ततस् (अव्ययः) |
| क्रुद्धा | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.३) |
| निशाचराः | निशाचर (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | म | प्य | ति | नि | द्र | स्तु |
| य | दा | नै | व | प्र | बु | ध्य | त |
| शा | प | स्य | व | श | मा | प | न्न |
| स्त | तः | क्रु | द्धा | नि | शा | च | राः |