केचिच्छरण्यं शरणं स्म रामं; व्रजन्ति केचिद्व्यथिताः पतन्ति ।
केचिद्दिशः स्म व्यथिताः प्रयान्ति; केचिद्भयार्ता भुवि शेरते स्म ॥
केचिच्छरण्यं शरणं स्म रामं; व्रजन्ति केचिद्व्यथिताः पतन्ति ।
केचिद्दिशः स्म व्यथिताः प्रयान्ति; केचिद्भयार्ता भुवि शेरते स्म ॥
अन्वयः
केचित् indeed, शरण्यम् refuge, रामम् Rama, शरणंव्रजन्तिस्म who was capable of giving shelter, केचित् some, व्यथिताः became panicked, पतन्तिस्म fell down, केचित् some, व्यथिताः panic, दिशः directions, पतन्तिस्म ran, केचित् भयार्ताः some out of fear, भुवि ground, शेरतेस्म lay down.M N Dutt
Then some sought the shelter of Răma, worthy of being so sought; and some, stricken (with panic), dropped to the earth; and some, suffering (from fear), fled to the carindal points; and some through stress (of apprehension) lay down on the ground.Summary
Indeed, some took refuge from Rama who could give shelter, some fell down in panic, some went in all directions in panic, and some out of fear lay down on the ground.पदच्छेदः
| केचिच् | कश्चित् (१.३) |
| छरण्यं | शरण्य (२.१) |
| शरणं | शरण (२.१) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
| रामं | राम (२.१) |
| व्रजन्ति | व्रजन्ति (√व्रज् लट् प्र.पु. बहु.) |
| केचिद् | कश्चित् (१.३) |
| व्यथिताः | व्यथित (√व्यथ् + क्त, १.३) |
| पतन्ति | पतन्ति (√पत् लट् प्र.पु. बहु.) |
| केचिद् | कश्चित् (१.३) |
| दिशः | दिश् (२.३) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
| व्यथिताः | व्यथित (√व्यथ् + क्त, १.३) |
| प्रयान्ति | प्रयान्ति (√प्र-या लट् प्र.पु. बहु.) |
| केचिद् | कश्चित् (१.३) |
| भयार्ता | भय–आर्त (१.३) |
| भुवि | भू (७.१) |
| शेरते | शेरते (√शी लट् प्र.पु. बहु.) |
| स्म | स्म (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| के | चि | च्छ | र | ण्यं | श | र | णं | स्म | रा | मं |
| व्र | ज | न्ति | के | चि | द्व्य | थि | ताः | प | त | न्ति |
| के | चि | द्दि | शः | स्म | व्य | थि | ताः | प्र | या | न्ति |
| के | चि | द्भ | या | र्ता | भु | वि | शे | र | ते | स्म |